www.yourCAonline.com
By Atul Kumar

Accounting, Taxation and Auditing Services

Blog

view:  full / summary

Story

Posted by atulkumar on February 3, 2012 at 2:30 AM Comments comments (1)

Ek Baar Ek Doctor Raat Me Mariz Ko Dkhne Gya Wapas Aate Time Tej Barish Or Tufan Aa Gaya

 

To Doct. Ko Vahan Ek Ghar Dhikai Diya. Doct. Us Ghar Me Ghusa To Usne Us Ghar Me Ek

 

Sundar Ladki Akeli Thi Uska Bap Bhi Tufan Ki Vajah Se Nahi Aaya tha. Dr. Ne Vahan Rukne Ki Jagah

 

Mangi Lekin Unke Ghar Me Ek Hi Bed Tha. To Ladki Ne Kaha K Tum Is Par So Jao Mai Neeche So Jati

 

Hoo. To Doct. Ne Aisa Karne Se Mana Kar Diya. To Phir Ladki Kahne Lagi K Ek Kam Karte Hai Hum

 

Dono Isi Bed Par So Jate Hai Or Apne Beech Me Takia Laga Lete Hai Or Beech Me Takia Laga K Dono

 

So Gaye To Raat Me Doct. Ki Aankh Khuli To Ladki K Badan Ko Dekhkar Use Kuch Hua Lekin Phir

 

Socha K Isne Mujhe Raat Me Rukne Ko Jagah Di Hai Iske Bare Me Kuch Galat Nahi Sochna Chahiye.

 

Subah Jab Dr. Jane Laga To Ghar K Darvaje Par Ek Ped Pada Tha Doc. Ne Use Hatane Ki Puri

 

Koshish Ki Lekin Ped Ko Nahi Hata Paya To Ladki Aayi Or Usne Ped Ko Ek Jhtke Me Hata Diya. Yah

 

Dekhkar Doct. Bola K Tumne Yah Ped Kaise Hata Diya Mujhse To Yah Hila Bhi Nahi. To Ladki Ne Ans.

 

Diya K.......... Jo Aadmi Puri Raat Ek Takia Nahi Hata Paya Vo Ped Kya Hatayega........

 

SOCH LENA JAYADA IMANDARI BHI NAHI DHIKANI CHAHIYE NAHI TO NAMARD KAHLAOGE............

Character of Gabbar Singh

Posted by atulkumar on February 3, 2012 at 2:20 AM Comments comments (0)

गब्बर सिंह का चरित्र चित्रण


1. सादा जीवन, उच्च विचार: उसके जीने का ढंग बड़ा सरल था. पुराने और मैले कपड़े, बढ़ी हुई दाढ़ी, महीनों से जंग खाते दांत और पहाड़ों पर खानाबदोश जीवन. जैसे मध्यकालीन भारत का फकीर हो. जीवन में अपने लक्ष्य की ओर इतना समर्पित कि ऐशो-आराम और विलासिता के लिए एक पल की भी फुर्सत नहीं. और विचारों में उत्कृष्टता के क्या कहने! 'जो डर गया, सो मर गया' जैसे संवादों से उसने जीवन की क्षणभंगुरता पर प्रकाश डाला था.

 

२. दयालु प्रवृत्ति: ठाकुर ने उसे अपने हाथों से पकड़ा था. इसलिए उसने ठाकुर के सिर्फ हाथों को सज़ा दी. अगर वो चाहता तो गर्दन भी काट सकता था. पर उसके ममतापूर्ण और करुणामय ह्रदय ने उसे ऐसा करने से रोक दिया.

 

 

3. नृत्य-संगीत का शौकीन: 'महबूबा ओये महबूबा' गीत के समय उसके कलाकार ह्रदय का परिचय मिलता है. अन्य डाकुओं की तरह उसका ह्रदय शुष्क नहीं था. वह जीवन में नृत्य-संगीत एवंकला के महत्त्व को समझता था. बसन्ती को पकड़ने के बाद उसके मन का नृत्यप्रेमी फिर से जाग उठा था. उसने बसन्ती के अन्दर छुपी नर्तकी को एक पल में पहचान लिया था. गौरतलब यह कि कला के प्रति अपने प्रेम को अभिव्यक्त करने का वह कोई अवसर नहीं छोड़ता था.

 

 

4. अनुशासनप्रिय नायक: जब कालिया और उसके दोस्त अपने प्रोजेक्ट से नाकाम होकर लौटे तो उसने कतई ढीलाई नहीं बरती. अनुशासन के प्रति अपने अगाध समर्पण को दर्शाते हुए उसने उन्हें तुरंत सज़ा दी.

 

5. हास्य-रस का प्रेमी: उसमें गज़ब का सेन्स ऑफ ह्यूमर था. कालिया और उसके दो दोस्तों को मारने से पहले उसने उन तीनों को खूब हंसाया था. ताकि वो हंसते-हंसते दुनिया को अलविदा कह सकें. वह आधुनिक यु का 'लाफिंग बुद्धा' था.

 

 

6. नारी के प्रति सम्मान: बसन्ती जैसी सुन्दर नारी का अपहरण करने के बाद उसने उससे एक नृत्य का निवेदन किया. आज-कल का खलनायक होता तो शायद कुछ और करता.

 

 

7. भिक्षुक जीवन: उसने हिन्दू धर्म और महात्मा बुद्ध द्वारा दिखाए गए भिक्षुक जीवन के रास्ते को अपनाया था. रामपुर और अन्य गाँवों से उसे जो भी सूखा-कच्चा अनाज मिलता था, वो उसी से अपनी गुजर-बसर करता था. सोना, चांदी, बिरयानी या चिकन मलाई टिक्का की उसने कभी इच्छा ज़ाहिर नहीं की.

 

 

8. सामाजिक कार्य: डकैती के पेशे के अलावा वो छोटे बच्चों को सुलाने का भी काम करता था. सैकड़ों माताएं उसका नाम लेती थीं ताकि बच्चे बिना कलह किए सो जाएं. सरकार ने उसपर 50,000 रुपयों का इनाम घोषित कर रखा था. उस युग में 'कौन बनेगा करोड़पति' ना होने के बावजूद लोगों को रातों-रात अमीर बनाने का गब्बर का यह सच्चा प्रयास था.

 

 

9. महानायकों का निर्माता: अगर गब्बर नहीं होता तो जय और व??रू जैसे लुच्चे-लफंगे छोटी-मोटी चोरियां करते हुए स्वर्ग सिधार जाते. पर यह गब्बर के व्यक्तित्व का प्रताप था कि उन लफंगों में भी महानायक बनने की क्षमता जागी.


Rss_feed